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Pratham Patel 2 months ago
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जगज्जाल पालम् कचत् कण्ठमालं
शरच्चन्द्र भालं महादैत्य कालम् ।
नभो-नीलकायम् दुरावारमायम्
सुपद्मा सहायं भजेऽहं भजेऽहं ॥
सदाम्भोधिवासं गलत्पुष्हासं
जगत्सन्निवासं शतादित्यभासम् ।
गदाचक्रशस्त्रं लसत्पीत-वस्त्रं
हसच्चारु-वक्त्रं भजेऽहं भजेऽहं ॥
रमाकण्ठहारं श्रुतिवातसारं
जलान्तर्विहारं धराभारहारम् ।
चिदानन्दरूपं मनोज्ञस्वरूपं
धृतानेकरूपं भजेऽहं भजेऽहं ॥
जराजन्महीनम् परानन्द पीनम्
समाधान लीनं सदैवानवीनम् ।
जगज्जन्म हेतुं सुरानीककेतुम्
त्रिलोकैकसेतुं भजेऽहं भजेऽहं ॥
कृताम्नाय गानम् खगाधीशयानं
विमुक्तेर्निदानं हरारातिमानम् ।
स्वभक्तानुकूलम् जगद्दृक्षमूलम्
निरस्तार्तशूलम् भजेऽहं भजेऽहं ॥
समस्तामरेशम् द्विरेफाभ केशं
जगद्विम्बलेशम् हृदाकाशदेशम् ।
सदा दिव्यदेहं विमुक्ताखिलेहम्
सुवैकुन्ठगेहं भजेऽहं भजेऽहं ॥
सुराली-बलिष्ठं त्रिलोकीवरिष्ठं
गुरूणां गरिष्ठं स्वरूपैकनिष्ठम् ।
सदा युद्धधीरं महावीर वीरम्
महाम्भोधि तीरम् भजेऽहं भजेऽहं ॥
रमावामभागम् तलनग्ननागम्
कृताधीनयागम् गतारागरागम् ।
मुनीन्द्रैः सुगीतं सुरैः संपरीतं
गुणौगैरतीतं भजेऽहं भजेऽहं ॥
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